रादौर – पूर्णगढ़ में प्रवासी मजदूरों पर प्रतिबंधित मास पकाने का आरोप, कार्यवाही की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया थाने में पंहुच प्रदर्शन 

349
ख़बर सुने
🔔 वीडियो खबरें देखने के लिए 👉 यहां क्लिक करें 👈और हमारे चैनल को सब्सक्राइब व 🔔 का बटन दबा कर तुरंत पाए ताजा खबरों की अपडेट

रादौर,11 जुलाई (कुलदीप सैनी) : गांव पूर्णगढ़ में प्रतिबंधित मांस मिलने की सूचना पर गांव में हंगामा हो गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने शक के आधार पर किसान के नलकूप पर रुकी प्रवासी मजदूरों को काबू कर मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही रादौर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके से मांस बरामद किया। यह मांस किस पशु का है फिलहाल साफ नहीं है। पुलिस सैंपल भेज कर जांच करवाने की बात कह रही है।

    रविवार की देर रात पूर्णगढ़ व बापा के सैंकड़ो ग्रामीण रादौर पुलिस स्टेशन में पंहुचे ओर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रवासी मजदूरों द्वारा पकाया जा रहा मांस प्रतिबंधित है। एक ग्रामीण बख्शीश सिंह ने बताया कि गांव पूर्णगढ़ में एक किसान के नलकूप पर धान लगाने के लिए प्रवासी लेबर रुकी हुई है। रविवार को लेबर से कुछ लोग गांव बापा से चिकन लेकर आए। शाम के समय जैसे ही वे उसे बना रहे थे तो गांव के कुछ लोग वहां पर पहुंच गए। इसके बाद यह बात गांव में आग की तरह फैल गई। गांव के सैकड़ों लोग वहां पर पहुंच गए और लेबर कर्मियों की धुनाई शुरू कर दी। इसी दौरान सूचना पुलिस तक पहुंची तो पहले डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद रादौर थाने की टीम गई। रात करीब साढ़े नो बजे लेबर कर्मियों को पुलिस वहां से निकालकर थाने लेकर पहुंची। इस दौरान दोनों गांव के सैंकड़ों लोग थाने में भी पहुंच गए और देर रात तक हंगामा करने में लगे रहे। उनकी मांग थी कि आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। वही मामले की सूचना पर गौ रक्षक दल और हिंदू संगठनों के वर्कर भी मौके पर पहुंचे।

    इस पूरे मामले पर रादौर डीएसपी रजत गुलिया ने बताया कि प्रतिबंधित मीट की सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पंहुची थी। यह मीट किस पशु या जानवर का है अभी इस बारे कुछ कह नही जा सकता। मौके पर पशुपालन विभाग की टीम को सेम्पल के लिए बुलाया गया है। सेंपल के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, उस आधार पर कार्यवाही की जाएगी। उन्होने बताया कि अभी इस मामले में पांच लोगों को काबू किया गया है, जिनमें कुछ प्रवासी मजदूर है, जबकि कुछ गांव बापा के है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here