2022 बीता लेकिन किसानों की आमदनी नहीं हुई दोगुनी: वरुण चौधरी

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कृषि सुधार की जानकारी के लिए सरकार ने विदेशी दौरों पर खर्चे करोड़ों
बराड़ा, 31 दिसम्बर : वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात महज जुमला साबित हुई। हल्का मुलाना विधायक वरूण चौधरी ने प्रैस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी तक नहीं कर सकी लेकिन सरकार में बैठे मंत्रियों व अधिकारियों ने कृषि क्षेत्र में सुधार की जानकारी जुटाने के लिए पिछले पांच सालों में अनेकों देशों के दौरे कर लगभग 8 करोड़ 44 लाख रूपये फुंक दिए। उन्होनें बताया कि अकेले पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के विदेशी दौरों पर 7 करोड से अधिक की राशि खर्च की गई है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अतारांकित सवाल लगाकर कृषि मंत्री जेपी दलाल से पिछले 5 वर्षों के दौरान सरकारी प्रतिनिधिमंडलों द्वारा किए गए विदेशी दौरों, प्रतिनिधि मंडल के चयन के मापदंड के साथ प्रतिनिधियों के नाम एवं दौरे पर किए गए खर्च का ब्यौरा मांगा गया था। इस सवाल में प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी भी कृषि मंत्री से मांगी गई थी। जिस जवाब में कृषि मंत्री द्वारा यह जानकारी दी गई। विधायक ने विदेशी दौरों पर बोलते हुए कहा कि अनेकों दौरे व करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद किसानों को इसका क्या लाभ मिला यह स्पष्ट नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इन दौरों पर खर्च को लेकर कोई आपत्ति नहीं है परंतु खर्च होने पर यदि किसानों को इसका कोई लाभ नही हुआ तो फिर पूरी आपत्ति है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई थी अब तो 2022 का आखिरी दिन आ गया है, सरकार बताएं कि किसानों की आय दोगुनी होने में और कितना समय लगेगा या सरकार का किसानों से किया गया यह वायदा भी और वायदों की तरह सिर्फ एक जुमला ही था। उन्होंने कहा कि इस सरकार में कृषि संबंधित हर सामान के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि हुई है परंतु फसलों के मूल्यों में नाममात्र की वृद्धि की जाती है किसानों को समय पर यूरिया/खाद नहीं मिला और मिला तो महंगे दामों पर मिला। फ़सल के नुक़सान पर भी किसानों को आज तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। इस सरकार में किसानों की मुश्किलें घटने की बजाय बढ़ी है। आज साल 2022 निकल चुका है पर सरकार ने गन्ने के मूल्यों में एक रुपये की वॄद्धि नहीं की और जब सदन में इस मुद्दे पर बोलना चाहा तो बोलने नहीं दिया गया। किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज केस अब तक पूरे वापिस नही हुए। इस पर भी उनके द्वारा दिया गया काम रोको प्रस्ताव नामंजूर कर दिया गया जो इस सरकार की किसान विरोधी सोच को दर्शाता है। विधायक ने कहा कि उनके द्वारा विधानसभा में अतारांकित सवाल में सरकार से विदेशी दौरे पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के चयन के मानदंड एवं प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा दौरे वार की गई कार्यवाही की जानकारी मांगी थी जो नहीं दी गई। प्रदेश के किसान हित के लिए जो सवाल सरकार से पूछे थे। सरकार ने सदन में उन सवालों के पूरे जवाब नहीं दिए है। जिनकी शिकायत विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता से की जाएगी।

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