Home Ambala हरियाणा में नशा तस्करों पर शिकंजा तेज, 9 माह में 3,809 केस...
चंडीगढ़, 12 अक्टूबर(कुलदीप सैनी)। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई तेज करने और ड्रग कार्टेल के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति तैयार की है। इसके तहत साइबर जांच, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देन की निगरानी, अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई तथा नशा तस्करी के मामलों में दोषसिद्धि बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) की उच्चस्तरीय बैठक में इन प्रयासों की समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 71 ड्रग कार्टेल की पहचान की गई है और उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए कार्रवाई जारी है।
नशा तस्करी के 3,809 मामले दर्ज
हरियाणा पुलिस ने जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,809 मामले दर्ज किए और 6,824 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पिछले वर्ष इसी अवधि में 2,722 मामले दर्ज हुए थे और 5,393 गिरफ्तारियां की गई थीं। इस तरह मामलों में 39.93 प्रतिशत और गिरफ्तारियों में 26.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई के तहत जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 113 मामलों में 19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गईं। पिछले वर्ष इसी अवधि में 49 मामलों में 5.92 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच हुई थीं। प्रदेश ने इस वर्ष संपत्तियां अटैच करने के लिए 30 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा 15.09 करोड़ रुपये की संपत्तियों से संबंधित प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी के पास विचाराधीन हैं।
ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2022 से सितंबर 2026 तक 167 नशा तस्करों से संबंधित 176 अवैध या अनधिकृत कब्जे वाली संपत्तियां ध्वस्त की गई हैं।
हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की बरामदगी बढ़ी
जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान हेरोइन की बरामदगी बढ़कर 84.695 किलोग्राम हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 43.176 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी। इसी तरह अफीम की बरामदगी 235.550 किलोग्राम से बढ़कर 430.326 किलोग्राम और कोकीन की बरामदगी 1,004.76 ग्राम से बढ़कर 2,958.757 ग्राम हो गई।
साइबर जांच और वित्तीय नेटवर्क पर फोकस
एचएसएनसीबी के चेयरमैन संजय कुमार ने बताया कि डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली नशा तस्करी की जांच के लिए विशेष प्रकोष्ठ विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही ड्रग कार्टेल की अवैध कमाई और वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के लिए वित्तीय जांच प्रकोष्ठ भी काम कर रहा है। इस दिशा में 139 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
बैठक में प्रेगाबालिन, जोपिक्लोन और टैपेंटाडोल जैसी दवाओं के दुरुपयोग तथा सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों की निगरानी पर भी चर्चा हुई।
एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि दर 58.34 प्रतिशत
प्रदेश में एनडीपीएस मामलों की दोषसिद्धि दर जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान बढ़कर 58.34 प्रतिशत हो गई, जबकि वर्ष 2025 में यह 54.68 प्रतिशत थी। नशा तस्करी के मामलों में प्रभावी अभियोजन के लिए 50 मामलों को विशेष निगरानी के लिए चिह्नित किया गया है। प्रदेश में 21 फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त आठ जिलों में एनडीपीएस मामलों के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक या विशेष न्यायालय कार्यरत हैं।
बैठक में 29 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, इनके संबंध में दो ब्लू नोटिस और एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। सरकार ने नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करने और जांच व अभियोजन के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया है।