हरियाणा में पराली जलाने वालों पर सख्ती, 30 नए ड्रोन भी लगेंगे

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चंडीगढ़, 13 अक्टूबर (कुलदीप सैनी) । हरियाणा में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी और जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। ग्राम स्तर पर 8,535 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जबकि सभी जिलों में पराली सुरक्षा बल का गठन किया गया है। खेतों की निगरानी के लिए 20 ड्रोन तैनात किए जा चुके हैं और जल्द ही 30 अतिरिक्त ड्रोन भी लगाए जाएंगे। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मंत्री श्याम सिंह राणा ने केंद्र सरकार की ओर से आयोजित फसल अवशेष जलाने के प्रबंधन से संबंधित मंत्री-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरियाणा का पक्ष रखा। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री शामिल हुए।

किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करने के साथ आधुनिक कृषि मशीनों और वित्तीय प्रोत्साहन के जरिए सहायता दे रही है। प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कुल 66,050 आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।

वहीं, करीब 37 लाख एकड़ धान क्षेत्र के प्रबंधन के लिए 440 करोड़ रुपये की अनुमानित प्रोत्साहन राशि तय की गई है। इसके तहत किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

धान की सीधी बिजाई और फसल विविधीकरण पर जोर

सरकार किसानों को धान की सीधी बिजाई यानी डीएसआर (DSR) तकनीक अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को 4,500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

इसके अलावा, धान की जगह वैकल्पिक फसलें उगाने वाले किसानों को फसल विविधीकरण योजना के तहत 8,000 रुपये से 10,000 रुपये प्रति एकड़ तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जल बचत को प्रोत्साहित करना है।

निगरानी के लिए 50 ड्रोन होंगे तैनात

श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य में खेतों की निगरानी के लिए फिलहाल 20 ड्रोन तैनात किए गए हैं। जल्द ही 30 अतिरिक्त ड्रोन भी लगाए जाएंगे। इस तरह ड्रोन की कुल संख्या 50 हो जाएगी।

इसके साथ ही पूरे प्रदेश में 79 पीएम 2.5 सेंसर स्थापित किए गए हैं। ग्राम स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारी और जिलों में गठित पराली सुरक्षा बल भी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करेंगे।

कृषि मंत्री के अनुसार, सख्त नियमों और जागरूकता अभियानों के चलते अब तक फसल अवशेष जलाने की केवल सात घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इनमें हांसी में दर्ज एक घटना दुर्घटनावश हुई थी, जिसके संबंध में नियमानुसार 5,000 रुपये का चालान जारी किया गया। उन्होंने बताया कि शेष घटनाएं गैर-कृषि क्षेत्रों में हुई हैं।

केंद्र सरकार से 60 प्रतिशत वित्तीय सहायता की मांग

बैठक के दौरान हरियाणा सरकार ने केंद्र से पराली प्रबंधन के लिए किसानों को दिए जा रहे 1,200 रुपये प्रति एकड़ के प्रोत्साहन में 60 प्रतिशत हिस्सा वहन करने की मांग की। राज्य सरकार का मानना है कि इससे वित्तीय बोझ कम होगा और अधिक किसानों को योजना से जोड़ने में मदद मिलेगी।

इस बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना की। हरियाणा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के कृषि मंत्री भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

बैठक के दौरान हरियाणा के कृषि विभाग के निदेशक अमित खत्री और अतिरिक्त निदेशक प्रदीप मील भी मौजूद रहे।

किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने प्रदेश के किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय सरकारी योजनाओं, प्रोत्साहन राशि और उपलब्ध कृषि उपकरणों का लाभ उठाएं। उन्होंने पर्यावरण को स्वच्छ रखने और भूमि की उर्वरता शक्ति बनाए रखने के लिए फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने पर जोर दिया।